धमनियों में पहले कदम का एहसास लिए
लोग तब भी ख़ारिज करते थे, अब भी करते हैं
मैं बेबस हूँ, पहले की ही तरह
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मोहब्बत, झूठ का पुलिंदा भर नहीं
विश्वाश नहीं तो एहसास से फिर पूछो
ये सच है कि आशिक झूठ बोलते हैं मेरी तरह
और तमाम प्रेमिकाएं आतुर रहतीं हैं सुनने के लिए
बिल्कुल तुम्हारी ही तरह
पर ये कोई तोहमत नहीं
इससे झूठा साबित नहीं हो जाता, दुनिया का कोई भी प्रेम
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kya baat hai sir ji
जवाब देंहटाएंumda bhut umda
bahut khoob.....
जवाब देंहटाएंजबरदस्त सर
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