दुनियावी सर्च इंजिन में तलाशते उस काबिलियत को
जो देह को ठीक-ठाक तरीके से नोंच सके
वर्चुअल दुनिया के ब्रह्माण्ड में तैरते हैं रात को बिना सोये
भात-रोटी नहीं, साइबर वायर खाते हैं 24*7
ये परंपरा की कोई सीढ़ी नहीं, ये सौ साल टिकने वाले भी नहीं
पर दुनिया तो है इनके जैसों का ही
सवाल मत उठाना कोई, न इनपर-न इनसे
ये शबरी से तेज हैं, मीठा छांट लेते हैं चखने से पहले
ये मोहब्बतों के नए चश्मे, इश्क़ दिखता नहीं इनके बिना।
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