जब भी तुम्हारी जरुरत पड़ी
एक 'फासले' को उठाकर
रख दिया तुमने
हमारे दरमियान
जब जरुरत नहीं पड़ी
यह अंतर
उस वक़्त भी बना रहा
लेकिन तब मैंने नहीं सोचा
इसके बारे में
गोयाकि लोग आज भी कहते हैं-
हम दोनों के बीच
प्रेम की नदी बहती है
अब मैं भी मानता हूँ कि-
तुम 'अफवाह' हो
तुम्हारा शरीर काफी है
किसी भी भ्रम को
पैदा करने के लिए . . .
एक 'फासले' को उठाकर
रख दिया तुमने
हमारे दरमियान
जब जरुरत नहीं पड़ी
यह अंतर
उस वक़्त भी बना रहा
लेकिन तब मैंने नहीं सोचा
इसके बारे में
गोयाकि लोग आज भी कहते हैं-
हम दोनों के बीच
प्रेम की नदी बहती है
अब मैं भी मानता हूँ कि-
तुम 'अफवाह' हो
तुम्हारा शरीर काफी है
किसी भी भ्रम को
पैदा करने के लिए . . .
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